सरस्वती चालीसा

राग

नमामी,शमीशान,निर्वाण रूपम् रूद्राष्टक

दोहा

सरस्वती कूप जल शक्ति ,अदभुत महिमा जणाय ।

ज्यूँ पीवे नीर बढत रहे, बिन वपरे सुकी जाय ।।

चालीसा

1)नमस्कार,नमस्कार, नमस्कार माता विधात्री अखिल लोक बुद्धि प्रदाता

2)श्वेताम्बरी, श्वेत पद्म, सुहाता श्वेत हंस वाहन,विवेक जगाता

3)चतुर्भुजी, हर युग ,प्रभावी तु दाता त्रिलोकी सहर्ष शीश, तुझको नवाता

4)वीणा धारी, सुरीली, सुरों की तु दात्री सकल साज,आवाज़, वाणी प्रदात्री

5)तु विद्या की दानी, गुणों की है खानी मुदिता मनावें सभी ज्ञानी, ध्यानी

6)जो रीझे सुधारें , संवारे सब साजा रूठे तो , बिगारे ,रूचे ना जो काजा

7)सदा सुनीति तेरे मन को लुभाती, अनीति, अनाचार , करना न चाहती ,

8)राम अभी बन पाए ना राजा , सुरन चाहे विघन बिगारन काजा

9)राम सहमति से , सराई कुकाजा माँगी ,क्षमा , शरणा तेरी महाराजा

10)हर्षित हुए सुर,असुरारी ठानी सरस्वती मन में छाई गलानी

11)स्वारथ डुबोदी ,परमारथ की नावी चोला अमर का, भाव ,विषधर सा हावी (सर्प के जैसा)

12)करो ऐसी किरपा , उपयोग सद करी जाणी जो मन भावे तेरे,वो आचरण मन लाणी

13)तुम ही वाक शक्ति ,अज्ञान मिटाती पुस्तक धारिणी ,तेजस्वी बनाती

14)नवदुर्गा में कालरात्रि, तुम ही हो धाती (धात्री) रक्तबीज संहारी,त्रास मुक्ति कराती

15)महागौरी रूप,शिव, सुंदर सजाती सौम्य स्वरूप सभी मन भाती

16)सिद्धीदात्री ,कारज सिद्ध कराती सदा शिव को भी सिद्धी प्रदाती

17)शुभंती माता ,शुभ आशिष दाती मंगल काज ,शुभ फल ,शुभ्रु अपाती (देती)

18)नीलसरस्वती ,रंग नीला धराती जो ध्यावे, वो बुद्धि मेधावी है पाती

19))तु जड़ता मिटाती,ब्रह्मा की हो राणी मति द्रुत ,विस्तारी,यशस्वी बनाती

20)जीतियो न जाए बली,निर्बल शरीरे युक्ति जीते,शब्द बाण तुनीरे

21)पार्वती अंशी,कुमारिका अबला नाम कौशिकी ,विख्याता,तु प्रबला

22)शुम्भासुर नाशिनी शारदा ,उग्रतारा महोग्रतारा, मातंगी निर्भय उबारा

23)हुंकारा से ,भसम (भस्म)किया ध्रुमलोचन धुमावती ,चण्ड ,मुंड विमोचन

24)शुम्भ निशुम्भ मारी , असुरारी हराई त्रिलोकी हरषाई,जयकारा लगाई

दुर्गम (राक्षस) को मारी ,दुर्गा केहलाई यशोदा की नंदजा,भ्रामरी, नाम मांई

26शताक्षी,हज़ार नेत्र अश्रु करूणा बहाई शाकम्भरी ,भरण पोषण कराई

27)व्यर्थ आडम्बर माता मन न सुहाता सरल स्वभाव ही तुझको रिझाता

28)केवल गुडधानी भोग रूची सो खाती मनोरमा ,मंगल काज सुझाती

29)ईडा, पिंगला,सुषुम्ना त्रिनाडी सुर्य, चंद्र ,सरस्वती कहाती

30)श्वांस,प्रश्वास प्राणायाम द्वारा आत्मज्योत के दर्शन करवाती

31)बुद्धि,मन, आत्मकल्याणि तुम माता दिव्यता दे ,विद् वान बनाती

31)कंठ बिराजी, सभी के वीणापाणी मधुरी सी सरगम मीठी बजाती

32)सृष्टि आवाज तुम ही से पाती बिना तेरी किरपा,गुंगी बन जाती

33)वेद उच्चारी,प्रभु को रिझाती गायत्री ,धीमही,ध्यान कराती

34)तुम मुढता,हटाओ ,मेरी जडता मिटाओ मायावती ,सत्यता समझाओ

अज्ञानी अंधकार ने मुझको डराया तेरी सन्निधि, कोटी सुर्य प्रगटाया

36)अब ना मोह ,ना ममता , मुझको सताती शाश्वत ,प्रेम ,तेरी संगत बढ़ाती

37)स्व को समझु खुद जानु पहचानु मेरे ज्ञान चक्षु ऐसे माँ खुलाओ

38)बन पाऊं, अपनी ही मैं, परम हितैषी कराओ करम ,प्रभु मन भावे जैसी

39)मंद बुद्धि कारण मैंने ,कई जनमों को खोया ,न सोया, न गोया (समझा),बस रोया ही रोया

40)निज कल्याण सुझाई ,मन से “मैं “दो हटाई तूही,तूही धुन में ,मोही रमाई ,झुमाई

मन:कामना दोहे- 1)परमारथी बनु वृक्ष,नदी,सुर्य के जैसा । प्रकृति के रंग में रंग जाऊँ मैं ऐसा ॥

2)शरणागति तेरी स्वीकारी,मैया अब लो मोहे अपनाई । हे आद्य शक्ति ,मन उच्चाटन हटाकर परम शांति अनुभाई ॥

3)संघर्ष नहीं सरलता दीजो,बालभाव न बिसराउ । परमानंद चखने जीवनी ,आनंद बन जी पाऊं ।।

फलश्रुति-• सरस्वती चालीसा जो नित नियम करे पाठ । माँ के मन वो प्रिय बने,परम शक्ति ,सदा निभाए साथ ।।

इति श्री सरस्वती चालीसा भगवती प्रेरित विश्यामा निमित्त माँ के श्रीचरणो में समर्पित आध्य शक्ति कल्याणीहस्तु ॥

॥विश्यामा ॥